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Showing posts from September, 2012
ख्वाबों में भी, देते रहे दुआएँ जिसको
उस की बद्दुआ ने ही, तन्हा किया मुझे........

मंजरी
बेचा हैं जिसने अपना बचपन बाजारों मैं
वो कैसे जाएगा खिलौनों की दुकानों में........

मंजरी
मेरे दिल के टुकड़े है ये, तेरे रब के घर नहीं
जो रोज़ गिरते है , और फिर बन जाते है ..............

मंजरी
तेरे रूठ के जाने में भी ये ख़ुमार रहा
कि मिलूँगा फिर, तुझे मनाने के लिए......

मंजरी
तेरे ख्यालों से जब भी, रोशन हुआ दिल का कोना
मेरी तन्हाइयों ने मुस्कुरा कर देखा मुझको ........

मंजरी
बहुत खूबसूरत रहा होगा साथ उसका
लम्हें गुज़रते गए पर वक़्त ठहर गया

मंजरी ...............
खारों में लिपटे हुए गुलों की तरह
तेरी यादों को महफूज़ रखा हैं मैंने.....

मंजरी