Sunday, 28 June 2015

तमाशबीन की सरहदों को देखा हैं किसने
क़त्ल करके भी अनजान खड़े रहते है ....
मंजरी

Tuesday, 21 April 2015

उस मुकाम पे आ गया हूँ मैं मोहब्बत में
तेरी बद्दुआ भी अब दुआ सी लगती है मुझे ...

मंजरी
21 april 2015

Monday, 20 April 2015

किसी की निगाह में जब मोहब्बत देखता हूँ
तेरी बेवफ़ाई जार- जार रुलाती है मुझे
वो करते है बात महफ़िलों की रौनक की
अब तो बस तन्हाई ही लुभाती है मुझे...

मंजरी
20 april 2015..